छात्रा से किया 75 बार balatkar

Posted on
  • Tuesday, October 22, 2013
  • by
  • DR. ANWER JAMAL
  • in
  • Labels:
  • आम तौर पर आप जब भी किसी से समाज में गिरते मूल्यों को ऊपर उठाने के बारे विचार विमर्श करेंगे तो यह सुनने को मिलता है कि शिक्षा इन सब समस्याओं का हल है. ...लेकिन क्या सचमुच शिक्षा समाज से बुराईयों को हटा रही है ? ताज़ा खबर यह है कि एक अध्यापक ने चौथी क्लास की अपनी शिष्या से बलात्कार करना शुरू किया तो 75 बार कर डाला। इसलिए सब अपने बच्चे बच्चियों की हिफाज़त के लिये उनके टीचरों पर सतर्क दृष्टि ज़रूर रखे. पूरी ख़बर पढने के लिए अखबार की कटिंग देख लें. एक बार फिर सोचिये कि कौन सी चीज़ हमसे छूट रही है ? 


    ऐसे बहुत से केस हैं बल्कि ज़ुल्म के शिकार तमाम केस इस बात के गवाह हैं कि उन्हें बरसों भटकने के बाद भी दुनिया में न्याय नहीं मिल पाया. इसीलिये वैदिक धर्म और इसलाम में ही नहीं बल्कि अन्य धर्मों में भी मरने के बाद पीड़ितों को न्याय मिलने और पापियों को नर्क की आग में जलाये जाने का बयान मिलता है. नास्तिकों ने इस बात को मानने से ही इंकार कर दिया है. जीवन और मौत के बारे में सही जानकारी की कमी भी जरायम बहने का एक सबब है. हमें अपने बच्चों को बुरे लोगों की शिनाख्त कराने के साथ यह भी बताना चाहिये कि हमें किसने पैदा किया है और क्या करने के लिये पैदा किया है और
    नास्तिक बताते हैं कि दुनिया में तो किसी के साथ न्याय होता नहीं है. जिसका ज़ोर चलता है लोगों से अपने काम करवाता है, उनका शोषण करता है. मरने के बाद शोषण करने वाले और ज़ुल्म का शिकार होने वाले दोनों मरकर मिट्टी में मिल जाते हैं.
    सवाल यह है कि जब वे समाज में ऐसी बातें फैलाते हैं तो ताक़तवर लोग ज़ुल्म करने क्यों डरेंगे ?
    हम जानते ही हैं कि एक ही अधिकारी अमीर और गरीब के साथ क्या बर्ताव करते हैं ?
    नास्तिकता किसी समस्या का हल नहीं है बल्कि यह समस्याओं को बढ़ा रही है.
    नास्तिकों में वे लोग भी शामिल समझे जाने चाहियें जो धर्म का नाम लेते हैं लेकिन धर्म की बात नहीं मानते.
    Source: http://pyarimaan.blogspot.in/2013/10/75-balatkar.html

    0 comments:

    There was an error in this gadget

    Followers

    प्यारी माँ

    Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
    • क्षणिकाएं - १-खेतों में आई बहार पौधों ने किया नव श्रंगार रंगों की देखी विविधता उसने मन मेरा जीता | २-रंगों का सम्मलेन मोहित करता मेरा मन या को...
    • सेना का तमाशा बनाया बाबू मोशा ने - आज के समाचार पत्रों में एक समाचार के शीर्षक ने सर शर्म से झुका दिया ,शीर्षक था -''शहीद का कोई धर्म नहीं होता ,''शीर्षक सही था और लेफ्टिनेंट जनरल देवराज...
    • खलल - *न नींद न ख्वाब* *न आँसू न उल्लास,* *वर्षों से उसके नैन कटोरे * *यूँ ही सूने पड़े हैं !* *न शिकवा न मुस्कान* *न गीत न संवाद,* *सालों से उसके शुष्क अधरों क...
    • कुछ नहीं होने का सुख - जिन्दगी भर लगे रहे कि कुछ बन जाए, अपना भी नाम हो, सम्मान हो। लेकिन अब पूरी शिद्दत से मन कर रहा है कि हम कुछ नहीं है का सुख भोगें। जितने पंख हमने अपने शरीर ...
    • कैसे तुझको प्यार करूँ - विवशता देखो इस पागल मन की कहता दूर नहीं हरदम तेरे करीब रहूँ समझ न आता राज प्यार का कैसे तुझको प्यार करूँ देख तेरी प्यार भरी निगाहें दिल तुझमें डूबने लगता इ...
    • History fills the gap between origin of human and being human. - Dr Sharad Singh - *History Quotation of Dr (Miss) Sharad Singh**इतिहास मानव की उत्पत्ति और मानव होने के बीच की खाई को भर देता है - डॉ. शरद सिंह* *A piece of Sculpture in Thr...
    • बिजूका पर मेरी कवितायेँ - आपका लिखा कभी जाया नहीं होता इसका उदाहरण है ये कि हिंदी समय पर मेरी कवितायें शामिल हैं. वहाँ प्रोफ़ेसर संजीव जैन जी ने पढ़ीं और बिजूका समूह जो व्हाट्स एप पर ...
    • तुम और मैं -९ - *मैंने दीया जला कर * *कर दी है रोशनी ...* *तुम प्रदीप्त बन * *हर लो, मेरा सारा अविश्वास |* *मेरे आराध्य !* *आस के दीये में * *बची रहे नमी सु...
    • चिता की राख ! - रात में अचानक जोर जोर से आवाज आने से उ...
    • - * गज़ल * बेवफाई के नाम लिखती हूँ आशिकी पर कलाम लिखती हूँ खत में जब अपना नाम लिखती हूँ मैं हूँ उसकी जिमाम लिखती हूँ आँखों का रंग लाल देखूँ तो उस नज़र को मैं...
    • नींद बनाम ख्व़ाब - मैंने अपनी नींदें बेच, कुछ ख्वाब खरीदे थे। रख दिया था सहेज कर, उन्हें अपनी पलकों तले। वक़्त की बारिशों औ आंधी से, कुछ उड़ गए, कुछ बह गए। कुछ को बचाया जतन...
    • माँ तुझे प्रणाम - *माँ तुझे प्रणाम* *शत शत नमन कोटि प्रणाम * *माँ तुझे प्रणाम ।* *जब मैं तेरी कोख में आई * *तूने स्पर्श से बताया था * *ममता का कोई मोल नहीं * *तूने ही सि...
    • जाने कहाँ गया वो दिन??? - "आज कुछ special बना दो, Sunday है... " ... अभी तो परसों कढ़ाही पनीर बनी थी... "सुनो, मैं अपने दोस्तों से मिल कर आ रहा हूँ, वो आज Sunday है न..." ... हाँ, द...
    • अधूरे हम... - एक युवक बगीचे में खिन्न मुद्रा में बैठा था । एक बुजुर्ग ने उस परेशान युवक से पूछा - क्या हुआ बेटा क्यूं इतने परेशान हो ? युव...
    • भ्रष्ट आचार - स्वतंत्र भारत की नीव में उस समय के नेताओं ने अपनी महत्त्वाकांक्षाओं के रख दिये थे भ्रष्ट आचार फिर देश से कैसे खत्म हो भ्रष्टाचार ?
    • उदास आँखों में छुपी झुर्रियों की दास्तान (भाग -4) - *(रात में बेटी के फोन की आवाज़ से वे जग जाती हैं,और पुराना जीवन याद करने लगती हैं.उनकी चार बेटियों और दो बेटों से घर गुलज़ार रहता. पति गाँव के स्कूल में श...

    मन की दुनिया

    नारी का पूर्ण सशक्तिकरण

     
    Copyright (c) 2010 प्यारी माँ. All rights reserved.